कंप्यूटर सभी गणनाएँ बाइनरी (0 और 1) में करता है। दशमलव संख्याओं को प्रदर्शित करने के लिए मुख्यतः दो विधियाँ उपयोग की जाती हैं –
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फिक्स्ड पॉइंट प्रस्तुतीकरण
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फ्लोटिंग पॉइंट प्रस्तुतीकरण
1. फिक्स्ड पॉइंट संख्या प्रस्तुतीकरण
इस विधि में दशमलव (या बाइनरी) बिंदु की स्थिति पहले से निश्चित (Fixed) रहती है। यह अपनी जगह नहीं बदलता।
संरचना:
संख्या को दो भागों में बाँटा जाता है:
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पूर्णांक भाग (Integer Part)
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भिन्नात्मक भाग (Fraction Part)
उदाहरण:
यदि 8 बिट में
4 बिट पूर्णांक के लिए और
4 बिट भिन्न के लिए निश्चित हों,
तो संख्या 0101.1100 होगी:
पूर्णांक भाग = 5
भिन्न भाग = 0.75
अतः कुल संख्या = 5.75
विशेषताएँ:
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हार्डवेयर सरल होता है।
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गणना तेज होती है।
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मेमोरी कम लगती है।
सीमाएँ:
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बहुत बड़ी या बहुत छोटी संख्याएँ प्रदर्शित नहीं कर सकता।
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ओवरफ्लो की संभावना रहती है।
2. फ्लोटिंग पॉइंट संख्या प्रस्तुतीकरण
परिभाषा:
इस विधि में दशमलव (या बाइनरी) बिंदु की स्थिति बदल सकती है, इसलिए इसे फ्लोटिंग पॉइंट कहते हैं। यह वैज्ञानिक संकेतन (Scientific Notation) के समान है।
उदाहरण:
6.02 × 10²³
संरचना:
फ्लोटिंग पॉइंट संख्या तीन भागों में होती है:
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Sign (चिन्ह)
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Exponent (घात)
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Mantissa (मुख्य भाग)
सामान्य रूप:
संख्या = Mantissa × 2^Exponent
उदाहरण:
बाइनरी संख्या 1011.01 को सामान्य रूप में लिखें:
1.01101 × 2³
यहाँ
Mantissa = 1.01101
Exponent = 3
मानक प्रारूप:
अधिकांश कंप्यूटर Institute of Electrical and Electronics Engineers IEEE 754 मानक का उपयोग करते हैं।
32 बिट (Single Precision):
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1 बिट → Sign
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8 बिट → Exponent
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23 बिट → Mantissa
64 बिट (Double Precision):
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1 बिट → Sign
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11 बिट → Exponent
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52 बिट → Mantissa
विशेषताएँ:
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बहुत बड़ी और बहुत छोटी संख्याएँ दर्शा सकता है।
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वैज्ञानिक एवं इंजीनियरिंग गणनाओं में उपयोगी।
सीमाएँ:
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हार्डवेयर जटिल होता है।
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राउंडिंग त्रुटि हो सकती है।
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मेमोरी अधिक लगती है।
फिक्स्ड पॉइंट एवं फ्लोटिंग पॉइंट में अंतर
| आधार | फिक्स्ड पॉइंट | फ्लोटिंग पॉइंट |
|---|---|---|
| दशमलव बिंदु | स्थिर | परिवर्तनीय |
| रेंज | सीमित | बहुत अधिक |
| जटिलता | सरल | जटिल |
| उपयोग | छोटे सिस्टम | वैज्ञानिक गणना |

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