DNS (Domain Name System) क्या है

DNS (Domain Name System) इंटरनेट की उस प्रणाली का नाम है जो मनुष्यों द्वारा पढ़ने योग्य डोमेन नाम (जैसे www.example.com) को नेटवर्क के समझने योग्य IP address (जैसे 93.184.216.34) में बदल देती है।
अगर DNS न हो तो हमें हर वेबसाइट का लंबा-लंबा IP याद रखना पड़ेगा जो कि असुविधाजनक होगा इसलिए DNS इंटरनेट की “फोन डायरेक्टरी” की तरह काम करता है। यह वेबसाइट के नाम (Domain Name) को उसके IP Address में बदलता है, ताकि ब्राउज़र सही सर्वर तक पहुँच सके।

जैसे – जब आप अपने ब्राउज़र में लिखते हैं:

👉 www.google.com

तब आपका कंप्यूटर वास्तव में इसी नाम को नहीं समझता।
कंप्यूटर केवल IP Address समझता है — जैसे:

👉 142.250.182.132

DNS का काम डोमेन नेम को IP Address में बदलना। इसी प्रक्रिया को DNS Resolution कहते हैं।

सरल भाषा में कहें तो DNS = Domain Name → IP Address का अनुवादक है

जैसे मोबाइल में नाम से नंबर खोजते हैं, वैसे ही इंटरनेट पर DNS डोमेन के नाम से IP Address खोजता है।

DNS कैसे काम करता है? (Steps)

  1. User Query

    • आप ब्राउज़र में डोमेन नाम टाइप करते हैं।

  2. DNS Resolver

    • आपका इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) आपका DNS अनुरोध अपने रिजॉल्वर को भेजता है।

  3. Root Server

    • रिजॉल्वर सबसे ऊपर वाले “Root DNS Server” से पूछता है कि डोमेन कहाँ मिलेगी।

  4. TLD Server

    • फिर .com, .net, .in जैसे Top-Level Domain Server से पूछताछ की जाती है।

  5. Authoritative DNS Server

    • यहाँ से डोमेन का सही IP Address मिलता है।

  6. Browser receives IP

    • अब ब्राउज़र IP Address लेकर वेबसाइट के सर्वर से कनेक्ट करता है।

      DNS के मुख्य प्रकार

      1. Root DNS Server

      2. TLD DNS Server

      3. Authoritative DNS Server

      4. DNS Resolver (ISP का)

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